मेरे चारों बच्चे मेरी जान-7

हमारा बिज़नेस काफी बढ़ गया था, एक और शोरूम खोलने के लिए हम जगह की खोज में लगे थे। मेरी और अभिषेक की चुदाई अब रोज़ नहीं हो पाती थी, क्यूंकि शाम के वक़्त मीटिंग के लिए लोग आ जाते, या फिर हम किसी दूकान की जगह देखने निकल जाते।

अगर किसी दिन अभिषेक किसी कारण गुस्से में होता, वो आकर मेरी चूत और गांड बजा देता था, और मार-मार के चोदता था। मुझे बजा कर उसका गुस्सा बिल्कुल शांत हो जाता और ये हम सब के लिए ही अच्छी बात थी। वरना किसी का गुस्सा किसी दूसरे पर निकल जाए, तो बुरा होता है।

अगर एक माँ अपने बच्चे को और एक प्रेमिका अपने प्रेमी के गुस्से को सहन कर शांत कर सकती है, तो इससे बड़ी कोई ताकत नहीं इस दुनिया में। देखते ही देखते 2013 का साल आ गया और इस साल मेरा दूसरा बेटा, अखिल, बारहवीं की परीक्षा देने वाला था।

अखिल के बारे में आपको बता दूँ। मेरा तीसरा हीरो, अखिल, सबसे शरारती था। पढ़ाई में ठीक-ठाक पर खेल कूद में तेज़। अपने स्कूल का फुटबॉल कप्तान था। खेल में होने के कारण बिलकुल फिट था। मेरे तीनो बेटो में अखिल सबसे लम्बा है। वो हमारे बिज़नेस में काफी इंटरेस्ट लेता था।