माँ और नेहा आंटी को लंड चुसाया-1

दो महिलाएं, मंजू और नेहा, पार्क के एक एकांत कोने में बैठी हैं, सूरज की गर्मी और पास के फव्वारे की आवाज़ का आनंद ले रही हैं। उनकी बात-चीत, जो आमतौर पर सेक्स और डेटिंग के इर्द-गिर्द घूमती है, आज एक अप्रत्याशित मोड़ ले लेती है।

नेहा (मंजू की सहेली): अरे मंजू, मुझे पता है कि तुम अपने बेटे विशु से बहुत प्यार करती हो, लेकिन क्या तुमने कभी नहीं चाहा कि तुम्हारे जीवन में भी कोई ऐसा आदमी हो जो तुम्हें वही सुख दे सके जो विशु के पिता तुम्हें देते हैं?

मंजू (शरमाते हुए): ओह, नेहा, कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कि उस आदमी के साथ रहना कैसा होगा, जो मुझे वैसा महसूस करा सके जैसा मैं कल्पना करती हूं कि विशु के पिता करते हैं। लेकिन मैं विशु के बारे में कभी भी उस तरह से नहीं सोच सकी। वह मेरा अनमोल बेटा है, मेरा सब कुछ है।

नेहा (मंजू की दोस्त): मैं तुम्हारे बेटे के बारे में बात नहीं कर रही हूं, मूर्ख।

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