खेल-खेल में बेटी को चोदा-2

पिछला भाग पढ़े:- खेल-खेल में बेटी को चोदा-1

जैसा मेरी बेटी नम्रता ने सुबह कहा था, वो 2 बजे घर वापस आई। मुझे संभलने का मौक़ा नहीं मिला। मैं बिल्कुल नंगा था। मुझे नंगा देख कर वो नाराज़ नहीं हुई। मुस्कुराते हुए मेरी गोद में बैठ लंड को पकड़ कर दबाया। मेरे गालों और होंठों को चूमने के बाद बोली, “पापा, मैं यह देख कर बहुत खुश हूं कि मेरे पापा का बल्ला बेटी की चूत में शॉट मारने के लिए तैयार है। मुझे मेरे बेड पर ले चलिए। हम वहीं चुदाई का खेल खेलेंगे।”

जब बेटी खुद पापा से चुदवाने को तैयार थी, तो फिर मुझे क्यों कोई परेशानी होती? मैंने उसे अपनी बाहों पर उठाया और उसके रुम में ले गया। 2 मिनट के रास्ते में उसने ब्लाउज़ के सारा बटन खोल दोनों पल्लों को फैला दिया। मैं बार-बार चूचियों को चूसते हुए उसे उसके रुम में ले गया। बेड के पास जाकर उसे बेड पर फेंका। वो नाराज़ नहीं हुई। अपने स्कर्ट और ब्लाउज़ को बाहर निकाल बेड से नीचे फेंका। अब मेरी बेटी भी मेरी तरह नंगी थी।

सुबह की तरह वो अपने दोनों हाथ की अंगुलियों से झांट को अलग कर चूत की पत्तियों को फैला कर बोली, “खेलने के लिए बल्ला और क्रीज़ दोनों तैयार है। आपको और जो करना है बाद में करना, जो पूछना है बाद में पूछना, पहले पूरी ताक़त से शॉट मारो।”

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