बिन बच्चे की औरत को बच्चे का सुख दिया-1

नमस्कार मेरे प्यारे पाठकों। ये कहानी मेरे जीवन की एक सत्य घटना पे आधारित हैं। कहानी थोड़ी विस्तार से होगी और लंबी भी होगी, इसीलिए मेरा आप से निवेदन है कि धैर्य रखे और कहानी का आनंद लें। ये कहानी कुछ भागों में भी आपके सामने प्रस्तुत हो सकती है।

मैं एक ब्राह्मण परिवार से हूँ, और दिखने में भी हैंडसम हूँ। 43 की उम्र में भी मैं बहुत ही फिट और स्पोर्ट्स खेलता हूँ, और प्रतिदिन जिम जाता हूँ। इसीलिए मैं काफ़ी फुर्तीला हूँ और स्टैमिना अच्छा है मेरा। नोएडा में एक सॉफ्टवेर कंपनी में अच्छी नौकरी है मेरी, और पारिवारिक जीवन भी अच्छे से चल रहा है।

मेरी शादी को 16 साल हो चुके हैं और एक 15 साल का बेटा भी है। मैं एक छोटे शहर का रहने वाला हूँ, और नौकरी के लिये नोएडा मैं रहता हूँ। मेरी शादी मेरे ही छोटे शहर में हुई है, और एक बहुत ही रूढ़िवादी और पुरातनपंथी परिवार से हैं हम। इसीलिए बीवी की भी सोच ऐसी ही है। सेक्स को एक ड्यूटी की तरह देखा जाता है जैसे-तैसे हो जाये और बस।

मैं एक बहत ही उत्सुक किसम का बंदा हूँ, जिसे हर चीज़ ट्राय करने में मज़ा आता है। शादी की शुरूवात् में तो सब ठीक था, और बाद में पता चला कि बीवी का इतना मन नहीं होता है चुदाई करने में, लेकिन वो मुझे मना नहीं कर पाती थी, क्योंकि मुझे चाहिए हर रात।
लेकिन बच्चा होने के बाद उसका कुछ मेडिकल कारणों से सेक्स से मन उठ गया, और अब महीने में 4 से 5 बार होने लगा।

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