अजब गांडू की गजब कहानी-3

पिछला भाग पढ़े:- अजब गांडू की गजब कहानी-2

युग के गांड चुदाई वाले दोस्तों के ग्रुप के कारण हमारा बाराबंकी जाना कम हो चुका था। युग का तो अक्सर शाम को उन लौंडेबाजों के कमरे में जाने का प्रोग्राम बन जाता था। युग के बहुत कहने पर भी अब तक मैं युग के साथ वहां नहीं गया था। फिर एक दिन मेरा भी युग के साथ चलने का प्रोग्राम ही बन गया।

वैसे तो लम्बी छुट्टियों में हम लोग बाराबंकी चले जाते थे, मगर एक उस बार की होली कि छुट्टियों के दिन हम बाराबंकी नहीं गए। युग का उन लड़कों के साथ बियर पीने और गांड चुदाई की मौज मस्ती का प्रोग्राम था। युग ने मुझे भी साथ चलने को कहा। मैं युग के साथ दोनों दोस्तों की गांड चुदाई के बारे में जानता ही था। हममें आपस में कुछ छुपा तो था नहीं।

जाने में तो मुझे कोइ एतराज नहीं था, मगर फिर भी मैंने युग से साफ़ कहा, “देख युग, तू अपने इन दोस्तों के साथ जो करता है वो तेरा मामला है, मुझे उससे कुछ लेना-देना नहीं। मगर तू मुझे इस गांड चुदाई वाले खेल में मत घसीट। मेरी दूसरे लड़कों की गांड चोदने में कोइ दिलचस्पी नहीं। मेरे लिए तेरी गांड चुदाई ही काफी है।”