मुकुल कुलश्रेष्ठ – हंसमुख रंगीला साहिल – भाग 2

साहिल अपनी और अपनी भाभी गुंजन की कहानी बता रहा था।

साहिल बोला, “हुआ ये जी की मैं एक दिन दोपहर में घर पर अपने कमरे में लेटा था कि गुंजन आ गई और मेरे पास ही बेड पर बैठ गयी। बोली कुछ नहीं”।

मैंने पूछा “क्या हुआ गुंजन” ? वो बोली “साहिल तेरे भैया क्या ऐसे ही हैं” ?

मैंने गुंजन से पूछा ,”गुंजन मैं कुछ समझा नहीं, ऐसे मतलब कैसे “?