मां बेटे की चुदाई – एक मनोचिकित्सक की ज़ुबानी-8

पिछला भाग पढ़े:- मां बेटे की चुदाई – एक मनोचिकित्सक की ज़ुबानी-7

नसरीन बता रही थी, “और यही गांड, फुद्दी, चूत, लंड, मेरी राजा, मेरी रानी बोलते-बोलते हम दोनों एक साथ झड़ गए।”

“कुछ देर बाद जब जमाल का लंड ढीला हो गया और जमाल मेरे ऊपर से उतर गया तो मैं उठी और कपड़े पहनने लगी।”

“जमाल लेटे-लेटे बोला, “भाभी थोड़ा और रुक जाओ एक चुदाई और करेंगे। अब पता नहीं मौक़ा मिलेगा या नहीं।”