मेरे चारों बच्चे मेरी जान-12

मुझे बेहद मज़ा आया।

अखिल ने कहा, “चल कुतिया आजा, घुटनों के बल हमारे नीचे बैठ जा। और अपने हाथ और जीभ कुतिया जैसे कर ले।”

मैंने अपने हाथ को कुतिया जैसा सामने कर लिया, और जीभ खोल कर उनके लौड़े के नीचे आ गयी। मुझे लगा वो अब मुठ मार कर अपना वीर्य मेरे ऊपर गिराएंगे, पर कुछ पलों में ही उन्होंने मेरे चेहरे पर मूतना शुरू कर दिया।

मुझे अचानक से ज़रा अजीब लगा, पर उनके गरम-गरम मूत के मेरे चेहरे पर पड़ने से मेरे चेहरे को आराम मिलने लगा। दोनों के मूत में एक बड़ी ही कड़वी सी गंध थी, किसी महंगी शराब जैसी। आज की ये रात सिर्फ सरप्राइज से ही भरी हुई थी।