रजनी की चुदाई उसी की जुबानी भाग-23 – करनाल के आख़री दो दिन

करनाल में पांचवें दिन की मस्त रात और छटा दिन

सरोज बेड के किनारे पर घुटनों और कुहनियों के बल उकडू हो कर बैठ गयी और चूतड़ पीछे की तरफ कर के उठा दिए। “चूत का गुलाबी छेद सामने दिखाई दे रहा था”। सरोज की देखादेखी हम भी वैसे ही बैठ गयीं – उकडू – चूतड़ पीछे कर के चूतड़ ऊपर उठा के ।

“हमारी चूतों के गुलाबी छेद भी दिखाई दे रहे होंगे”।

संतोष आया और सब की चूत में बारी बारी से लंड डाला, मगर धक्के नहीं लगाए। पहले एक एक बार लंड हमारी चूतों में डाला, फिर दो दो बार फिर शायद पांच पांच बार और ऐसे ही बढ़ते बढ़ते चुदाई शुरू हो गयी।

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