शीला की जवानी-15

कुछ देर चूसने के बाद नैंसी उठ खड़ी हुई। साथ ही नैंसी ने अपने पर्स में से कुछ निकाला, और हाथ में ले लिया और बोली, “चलो जीत।”

हम दोनों दूसरे कमरे में चले गए। जब ज्योति के कमरे के सामने से गुज़रे तो अंदर से “हुंह ज्योति, आअह ज्योति”,  “हुंह हुंह आह आह  संधू साहब क्या चोदते हो आप आह आआह  लगाओ संधू साहब” “ले मेरा ज्योति, ले पूरा ले,  ले चूत के अंदर तक ले, ये ले फुद्दी में आआह” की आवाजें आती सुनाई दी। लग रहा था संधू दबा कर चोद रहा था ज्योति को।

मैंने और नैंसी ने एक दूसरे की तरफ देखा और दूसरे कमरे की तरफ बढ़ गए। जाते ही नैंसी ने कपड़े उतार दिए। ज्योति की ही तरह कसा हुआ जिस्म था नैंसी का, मगर थोड़ा भारी था। मोटी चूचियां, तरबूज की तरह गोल गोरे चिकने चूतड़।

कुछ चुम्मा चाटी, लंड चुसाई, चूत चुसाई के बाद चुदाई का नंबर आ गया। मेरा ये उसूल है के मैं कभी लड़की को ये नहीं कहता कि मैंने उसे कैसे चोदना है। इसके उलट जैसे वो चुदवाना चाहती है, उसे वैसे ही चोदता हूं।

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