शीला की जवानी-16

शराब का सुरूर और तीन-तीन पानी छोड़ती चूतों की खुशबू, ऊपर से चुदाई की मस्ती की सिसकारियां। सब तरफ चुदाई का माहौल था। संधू ज्योति और शीला पर पिला पड़ा था। बारी-बारी दोनों की चुदाई कर रहा था। मैं नैंसी की चूत और गांड के मजे लूट रहा था।

कुल मिला कर सब के सब चुदाई के मौज मस्ती में डूबे हुए थे।

दस मिनट की चुदाई के बाद नैंसी मस्त हो गयी और आह जीत ओह जीत बोलने लगी। अचानक से नैंसी चूत चुदवाते-चुदवाते मेरे कान में बोली, “जीत अगर मैं तुझे अपने घर बुलाऊं, तो तू आएगा मुझे चोदने?”

मैंने भी कहा, “क्यों नहीं आऊंगा भरजाई। मुझे तो आपको चोद कर मजा ही बड़ा आया है, ख़ास कर आपकी गांड चोद कर।”

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