शीला की जवानी-17

पिछली रात की धुआंधार चुदाई की थकान से नींद तो बढ़िया आयी थी। सुबह उठा तो ज्योति ने ऊपर चाय के लिए बुला लिया।

मैं ऊपर चला गया, शीला और ज्योति नहा चुकी थी। शीला चाय बना रही थी, और ज्योति सोफे पर बैठी थी। मैं भी ज्योति के पास ही बैठ गया। शीला चाय लेकर आयी, तो मुझे संधू की रात वाली काटने वाली बात याद आ गयी।

मैंने ज्योति से पूछा “भरजाई एक बात बताओ, रात को नैंसी भरजाई, ये संधू के काटने की क्या बात कर रही थी?”

ज्योति हंस कर बोली, “जीते ये तो शीला बताएगी।” शीला फिस्स-फिस्स करके हंस रही थी।

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