पिछला भाग पढ़े:- मम्मी को सिड्यूस करके चोदने लगा-13
हिंदी xxx कहानी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, कि यामिनी और मैं मार्केट गए थे, जहां उसने काफी सामान लिया। फिर घर आ कर मनीषा के साथ हमारी सुहागरात शुरू हुई, और उसका बदन सहला कर हमने उसको झड़ा दिया। अब आगे-
फिर जब मनीषा शांत हुई, तो यामिनी ने ऊपर सरकते हुए अपना मुंह मनीषा के कांखों में चिपका दिया और वहां चाटने लगी। मैं ये देख कर बहुत उत्तेजित हो रही थी, तो मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुंह में भर लिया, और दांतों में फसा कर जीभ से टटोलने लगी।
साथ ही दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को मसलते हुए निप्पल से खेलने लगी। मनीषा की आंखे वापस बंद हो गई थी। ऊपर यामिनी उसकी कांखों को चाटते हुए, उसके गले को मसल रही थी। मैंने अब अपने हाथ को नीचे सरकाते हुए मनीषा की नाभि तक ले गई और, वहां गोल-गोल घुमाते हुए रगड़ने लगी। मनीषा बहुत उत्तेजित हो गई थी। इससे उसके बदन में तड़प बढ़ने लगी थी।
फिर जब मनीषा शांत हुई, तो यामिनी ने ऊपर सरकते हुए अपना मुंह मनीषा के कांखों में चिपका दिया और वहां चाटने लगी। मैं ये देख कर बहुत उत्तेजित हो रही थी, तो मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुंह में भर लिया, और दांतों में फसा कर जीभ से टटोलने लगी।
साथ ही दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को मसलते हुए निप्पल से खेलने लगी। मनीषा की आंखे वापस बंद हो गई थी। ऊपर यामिनी उसकी कांखों को चाटते हुए, उसके गले को मसल रही थी। मैंने अब अपने हाथ को नीचे सरकाते हुए मनीषा की नाभि तक ले गई और, वहां गोल-गोल घुमाते हुए रगड़ने लगी। मनीषा बहुत उत्तेजित हो गई थी। इससे उसके बदन में तड़प बढ़ने लगी थी।
मनीषा इससे अपने होंठों को खुद ही चबा रही थी। यामिनी भी मौके का फायदा उठाते हुए ऊपर सरक गई, और मनीषा का मुंह अपनी ओर करके उसके पूरे मुंह पर जीभ फेरने लगी। इससे उसका पूरा मुंह गीला होने लगा था। मैं अब उसके निप्पलों को दांतों में हल्के-हल्के मसलने लगी थी, जिससे मनीषा के होंठ फड़क रहे थे, जिसे यामिनी अपने मुंह में भरते हुए चूसने लगी, और एक हाथ से उसके निप्पल को मसलने लगी। ये देख कर मैंने भी अपने हाथ को नीचे करके मनीषा की चूत पर रख दिया।
मैं चूत के हिस्से सहलाते हुए पायजामी के ऊपर से ही रगड़ने लगी, और निप्पलों को खींच-खींच कर चूसने लगी। इससे मनीषा का बदन मचलने लगा। ये देख कर मैं और तेजी से चूत रगड़ने लगी। फिर कुछ ही पलों में वो वापस कमर उठा-उठा के झड़ने लगी। पर इस बार उसकी सिसकारी यामिनी के मुंह में ही दब गई थी। बस गूं गूं की आवाज ही सुनाई दे रही थी।
कुछ देर बाद मनीषा का बदन शांत हुआ। तब जाकर यामिनी ने उसके होंठों को आजाद कर दिया। फिर मैं धीरे से हाथ मनीषा की पायजामी में डालते हुए चूत पर ले गई। मनीषा की पेंटी पूरी तरह से गीली हो गई थी। मैंने हाथ बाहर निकाला, और मनीषा के चेहरे के सामने ले गई। तो यामिनी ये देख कर मुस्कराने लगी।
मनीषा ने ये देख कर अपनी आँखें बंद कर ली। मेरा हाथ एक-दम से चिपचिपा सा महसूस कर रहा था। ये देख कर बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं मनीषा की पायजामी को नीचे सरकाने लगी, तो मनीषा ने अपने हाथ से मेरा हाथ पकड़ लिया।
ये देख के यामिनी नीचे सरक गई और उसने उसका हाथ पकड़ कर वापस ऊपर करते हुए पकड़ लिया। फिर दूसरे हाथ से दूसरी तरफ से भी पायजामी को सरकाते हुए नीचे कर दिया, जिसे मैंने अपने पैरों में फसा कर उसके जिस्म से अलग कर दिया। फिर यामिनी ने मनीषा के एक पैर पकड़ कर अपने दोनों पैरों में फंसा लिया, और उसके निप्पल को मुंह में भरते हुए मनीषा की चूत को रगड़ने लगी।
मैंने भी मनीषा का दूसरा पैर पकड़ कर अपने पैरों में फंसा लिया। इससे मनीषा की चूत पूरी खुल गई थी, जिसमें उसकी पेंटी की पतली स्ट्रिप अटकी थी। मैं भी निपल्स को चूसते हुए मनीषा की नाभि को कुरेद रही थी, और यामिनी तेज-तेज चूत को रगड़ने लगी। फिर कुछ ही पलों में मनीषा कराहती हुई झड़ने लगी। पर यामिनी अभी भी लगातार उसकी चूत को रगड़े जा रही थी, जिस कारण अब मनीषा अपने चूतड़ को उठा-उठा के तड़प रही थी।
पर यामिनी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। साथ ही वो मनीषा के निप्पलों को दांतों में चबा भी रही थी। मनीषा का बदन बुरी तरह से तड़प रहा था, और 2 मिनट इसे बर्दाश्त करने के बाद मनीषा एक-दम से झटका देते हुए, चूतड़ों को उठा लेती है, और कराहती हुई झड़ने लगती है। पर झड़ने के साथ ही उसके पेशाब की धार भी उसके पेंटी से रिस कर आने लगती है।
करीब 15 से 20 सेकंड बाद जाकर उसका पेशाब रुकता है, तो वो निढाल सी बेड पर गिर कर लंबी लंबी सांसे लेने लगती है। ये देख कर यामिनी हंसने लगती हैं। फिर ऊपर सरकते हुए, उसके होंठों को अपने मुंह में भर लेती है, और अपनी जीभ को मनीषा के मुंह डाल कर उसका मुंह चूसने लगती है।
मनीषा बस बेड पर लेटी हुई थी। मैं फिर बेड से नीचे उतर कर अपनी पायजामी और टी-शर्ट निकाल देती हूं। यामिनी भी मुझे तिरछी नज़रों से घूरते हुए मनीषा के होंठों को चूस रही थी। फिर मैं बेड पर जा कर मनीषा के पैरों के बीच बैठ जाती हूं, और झुक कर उसकी पेंटी को पकड़ कर निकालने लगती हूं। तो वो वापस अपने हाथों से पेंटी पकड़ लेती हैं। ये देख कर यामिनी बैठते हुए उसके हाथ पकड़ लेती है। फिर मुझे देखती है तो मैं मनीषा की पेंटी खींच कर निकाल देती हूं।
फिर मैं उसके दोनों घुटने पकड़ कर उसके पैरों को फैला देती हूं। इससे मनीषा की नंगी चूत मेरे सामने खुल कर आ जाती हैं। जिसके ऊपर बाल का एक निशान भी नहीं था। उधर यामिनी फिर मनीषा के हाथों को पकड़ कर उसे बिठा के उसके टी-शर्ट को भी निकाल के अलग कर देती हैं। फिर वापस उसे धक्का देकर लिटा देती है।
मनीषा अब पूरी तरह से नंगी लेटी हुई थी। यामिनी फिर मेरी ओर देखने लगती है। फिर बेड पर खड़े होते हुए कामुक अंदाज में अपने टी-शर्ट को निकालती है। फिर मेरी ओर पीठ करके आगे झुकते हुए पायजामी को सरका कर निकाल देती हैं। मेरे सामने पेंटी में सिमटे उसके चूतड़ मुझे और गर्म कर रहे थे। वीडियो के अलावा मैंने उसे पहली बार इस तरह देखा था।
वो मेरी आंखों में एक बार देखते हुए, मनीषा के दोनों हाथों को पकड़ कर सिर के ऊपर कर देती है, और उसके पेट पर बैठते हुए आगे झुक जाती है। फिर वो वापस मनीषा के होंठों को चूसने लगती हैं। इससे यामिनी के चूतड़ मेरे सामने आ जाते है। मैं उत्तेजित होते हुए मनीषा के चूत पर जीभ से रगड़ने लगती हूं, जिससे मनीषा का बदन वापस मचलना शुरू कर देता है, और यामिनी के मुंह में ही उसकी मादक सिसक दबने लगती है।
मुझे उसकी चूत से नमकीन सा स्वाद आ रहा था, और चूत से निकलने वाले पानी और उसके पेशाब की गंध मुझे मदहोश कर रही थी। ऊपर से रूम में गूंजती मनीषा के मादक आवाजे हमे मदहोश के रही थी, जिससे उत्तेजित होकर मैं चूत में जीभ घुसाने की कोशिश कर रही थी।
मनीषा तड़पते हुए चूतड़ों को इधर-उधर कर रही थी, पर मैं दोनों हाथों से उसकी जांघें पकड़ कर उसकी चूत का रसपान कर रही थी। ऐसा करीब 3 से 4 मिनट तक चलता है, और मनीषा का बदन वापस अकड़ने लगता है। तो मैं तुरंत ही उसकी चूत को छोड़ कर हट जाती हूं। मैं यामिनी के चूतड़ों पर भी टपकी देती हूं, तो वो उसके होंठ छोड़ कर मुझे देखने लगती है।
मैं यामिनी को धक्का देकर साइड में लिटा देती हूं। फिर मनीषा को पकड़ कर बिठा देती हूं। फिर उसे यामिनी के ऊपर बैठने का इशारा करती हूं, तो वो यामिनी के ऊपर लेट जाती है। फिर मैं उसकी कमर पकड़ कर पीछे करके कुत्तियां वाले पोज में कर देती हूं। इससे मनीषा के चूतड़ मेरे सामने फैल जाते है।
नीचे लेटी यामिनी की चूत, जो कि पेंटी में लिपटी हुई गीली हो गई थी। जिसमें से यामिनी के चूत की दरार साफ-साफ महसूस होने लगी थी। इसे उत्तेजित होते हुए मैं मनीषा के चूतड़ों में जीभ डाल कर चूत चाटने लगती हूं। इससे वापस मनीषा सिसकने लगी, तो यामिनी मनीषा का मुंह पकड़ कर अपने स्तनों पर दबा देती है। तो मनीषा यामिनी के ब्रा को ऊपर करते हुए निप्पलों को मुंह में भरके चूसने लगती है।
ऐसा होते ही यामिनी भी सिसक उठती है, और अपनी आँखें बंद करके मनीषा के मुंह को कस कर अपने स्तनों पर चिपका देती है। मैं ये देख कर बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। मैंने एक हाथ से मनीषा के कमर को जकड़ रखा था, ताकि वो आगे ना सरके। मैंने मनीषा की चूत चाटते हुए, दूसरा हाथ यामिनी के चूत के ऊपर रखा, तो उसके बदन में सिरहन दौड़ पड़ी। पर मैंने बिना परवाह किए पेंटी के किनारे को सरका कर हाथ अंदर डाल दिया, जो कि चूत के ऊपरी हिस्से पर था।
उसकी चूत बालों से भरी हुई थी। ये महसूस करके मैं और ज्यादा उत्तेजित होने लगी। उत्तेजना में मैं मनीषा की चूत के साथ उसके गांड का छेद भी चाटने लगी, और साथ ही यामिनी के चूत के बालों को मुठ्ठी में भरने की कोशिश भी करने लगी। इससे यामिनी के बदन में भी सिरहन हो रही थी। क्योंकि मनीषा उसके स्तनों को तेज-तेज चूस रही थी, और मैं यामिनी की चूत को मसलने में लगी थी।
यामिनी की भी आंखे बंद हो गई थी। मुझे अब यामिनी की चूत का स्वाद लेना था, तो मैंने हिम्मत करके यामिनी की चूत पर अपने होंठ रखे। तो उसके बदन में सिरहन दौड़ उठी, पर मैं तुरंत ही पेंटी को साइड करके मुंह उसकी चूत में चिपका कर चाटने लगी। इससे यामिनी के मुंह से सिसक निकलने लगी। मैं समझ गई थी कि अब यामिनी भी गरम हो चुकी थी, तो वो विरोध नहीं करेगी। तो मैंने हिम्मत करते हुए, यामिनी की पेंटी को पकड़ कर नीचे खींच दिया, और घुटने के नीचे तक सरकाते हुए दोनों पैरों से निकाल दिया।
फिर मैंने उसके पैरों को फैलाया तो मुझे यामिनी के चमकते हुस्न पर काले बालों के जंगल दिखा। मैं बिना देरी के अपने होंठ उसके घने बालों के बीच फिराने लगी। इससे यामिनी का बदन भी तड़पने लगा। इससे यामिनी भी तड़पते हुए, मनीषा को ऊपर खींचते हुए, उसके होंठों को अपने होंठों में भर लेती है।
ये देख कर मैं अब उसकी चूत को तेजी से चाटते हुए, मनीषा के चूतड़ों को दोनो हाथों से पकड़ कर मसलने लगती हूं। और फिर उसकी चूत में 2 उंगलियों को डाल कर अंदर-बाहर करने लगती हूं। इससे अब दोनों के शरीर ही मचलने लगते हैं। मुझे बहुत मजा आ रहा था। ऐसे ही कुछ पल के बाद दोनों ही सिसकारी लेते हुए झटके देते हुए झड़ने लगती हैं।
यामिनी की चूत से निकलने वाले पानी को मैं होंठों से पीने लगती हूं। और जब दोनों का बदन शांत होता है, तो मैं यामिनी के चूत से अपना मुंह अलग करती हूं। फिर मैं बेड पर बैठ के उन्हें देखने लगती हूं।
मनीषा यामिनी के बदन पर ही लेटी थी, पर अचानक ही यामिनी मनीषा को साइड में हटा देती है, और उठ कर मुझे अपने ऊपर खींच लेती है। फिर वो एक हाथ से मेरे ब्रा को पकड़ कर हटा देती है, और एक स्तन को मुंह में भर लेती है। फिर अपने दूसरे हाथ को मेरे पेंटी में डाल कर मेरी चूत में उंगली करने लगती है। इससे मैं मचल उठती हूं। तो मनीषा मेरे सामने आकर मेरे होंठों को अपने होंठों में भर जीभ से खेलने लगती है। मैं इस आनंद को फील करके अपनी आँखें बंद कर लेती हूं।
यामिनी के हाथ लगते ही मेरे चूत गीली होने लगती है, और कुछ ही पल में मेरा शरीर झटके देते हुए झड़ जाती हूं, तो मनीषा मेरे होंठों को आजाद कर देती है। यामिनी मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों को चूसने लगती है, और मेरे मुंह में जीभ डाल कर चुम्बन का आनंद लेने लगती है। फिर कुछ पल बाद वो मेरे होंठ छोड़ कर मेरी आंखों में देखती है। फिर शर्मा कर मुंह फेर लेती है।
अगला भाग पढ़े:- मम्मी को सिड्यूस करके चोदने लगा-15